Jnana Prabodhini Kashmir Group

Development Through Friendship!

Blog

Straight from the heart of Kashmiri.

Posted by jnanaprabodhinikashmir at 12:21 AM on October 12, 2009

वाह वाह क्या बात होनी थी वही बात हो गयी. जो काम न होनी थी वही काम हो गयी . उन सब कामोमे हमारी आवाम खुदको खोती रही. मासूम जाने गयी, मासुमोंकी इज्जत लूट गयी फिर क्या ये सारी खताए अब हमारी हो गयी खताए अगर किसीकी होती है तो हमने चुना है कही खताए अगर ऐसी हो जो बिल्कुल माफ़ करने के लायक हो तो उसे माफ़ करो. और अगर खताए माफ़ करने के लायक बिल्कुल न हो तो उसे जरूर सजा दो. ये की नफरत क्यों और कैसे मिलती है? अगर लोग यही सोचते रहे की एक दुसरे के मजब अलग अलग होने से मिलती है. तो सबसे पाहिले एक मुस्लिम होकर आप सबको इस बात से आगाह कर रहा हूँ की हमारी मुसलमानियत हमें ये नहीं सिखाती की हमें नफरत बाटो . मुसलमानियत का मतलब यही है की जितानाभी प्यार आपके दिल में होगा तो उस सबकेसाथ ऐसे बाटो की कोई ये ना सोचे की ये हिन्दू है. इसके साथ नहीं चलेगा. या हिन्दू ये नहीं कहना चाहिए की भाई ये मुस्लिम है, काश्मिरी है इनके साथ कोई बात बाटनी नहीं है. ये दहशत जब होगा, और फिर उन्ही बन्दोसे जो काश्मिरी हिन्दू और मुस्लिम हो सबसे पहिला सवाल उनके जीमें आयेगा तो जाहिर है कोई चंडीगड़ का नाम लेगा, कोई पंजाब का नाम लेगा कोई दिल्ली का नाम लेगा कोई मुंबई का या किसी और का.. और कोई कहेगा मैं काश्मीर का हूँ . लेकिन ये चंडीगड़ ये दिल्ली ये मुंबई ये काश्मीर ये सबका वजूद कहा पे है. तो वो भारत मैं है. तो फिर किसीको ये हक्क नहीं बनता की काश्मिरी को दहशती कहते है.अगर काश्मिरी दहशत करते है, तो आप लोग कहाके हो? आप लोगोका वजूद भी तो वही है जो कश्मिरियोंका है तो इसका मतलब ये है की आप भी दहशतमें शामिल है. दरसल ये कहना है की गलत क्या है सही क्या है इसके बारे में हम सोचते ही नहीं . चाहे वो दिल्ली हो या काश्मीर .

मिसाल के तौर पर एक घर मैं चार लोग रहते है .२ बच्चे और माँ बाप वही माँ बाप उन बचोंको कोसेंगे, तंग करेंगे, लेकिन कभी सही रास्तेपे नहीं ले जाएँगे तो नतीजा क्या होगा? एक तो घर बरबाद हो जायेगा और घर के लोग भी. और वो बच्चे अपनी सही मंजिल को कभी नहीं पा सकेंगे. इसके एवज अगर उनको अच्छी तर्दियत (treatment ) दी जायेगी तो घर भी खुश और घर के लोग भी मतलब काश्मिरी कुछ ऐसा फिल कर रहे है की अगर भारत हमें अपना हिस्सा समज़ता है तो कश्मिरीयोंको वो सारे हक्क मिलने चाहिए जो दिए गए थे. नहीं तो कल कोई ऐसे वारजत (incident) पेश नहीं आनि चाहिए जैसे शोपियान का केस हुआ था तो वही रखवाले कभी मासूम इज्जतो और मासूम जाने बीछा जाती है की जहा नफरत की जड़े पैदा होती है तो लोग मजबूर होकर अपने घरोसे निकलकर सड्कोपे जाकर ऐतचाजी (जुलूस) करते है. शोपियन केस तो हालिका मसला है. ३-४ साल पाहिले बखारपुरा पुलवामा में ५ बचोंके एक बाप को फौज ने गोलियोंसे बहरमिसे चिर के रख दिया था और बच्चोंका सहारा उठाया था ये सब चीजे हम ऐतचाजी(जुलूस) मुजारी करे तो जायज है. नहीं तो कुछ लोगोंके बहकावे मैं आकर हम अपनी मंजिल खो देंगे. जो बिल्कुल ऐसे बहकते है और कहते है की काश्मीर जन्नत का एक नमुना है काश्मीर वो ऊँची ऊँची पहाडिया, घने घने बर्फ और ठंडी हवा निकलती है.तो हम काश्मीर को कुछ नहीं होने देंगे लेकिन करते क्या है गन्दगी फैलाते है. ये हुआ वो हुआ बहकाकर सारी कारोबार और एजूकेशन को रोकते है.

मैं एक स्टुडेंट की हैसियत से ये कहना चाहता हूँ की ये काश्मीर जो है वो बिल्कुल खुबसूरत कुदरती नजरोमें जन्नत का नमुना है एक खुबसूरत जन्नत को और खुबसूरत बनाने के लिए चाहिए की अपनी तालीमी दुनिया को ना रोके अगर ये तालीमी दुनिया किसीके बह्कावेमे आकर रुक गयी तो ये जन्नत जन्नत बनके नहीं रहेगी. तो यहाके प्यारे प्यारे फुल जिनसे जन्नत सज़ती है और अगर वही फुल सुखके गिर जायेंगे तो इस बागमें आनेको किसका मन होगा. इसके रखवाले इमानदारीसे बाग की रक्षा करे . कही ऐसा ना हो की बाग सुखकर रखावालोको खुद अपनीही बागमें से निकलना पड़े और बाद मैं पचताना पड़े. बाकी मेरी यही दुआ है की काश्मीर मैं आकर कश्मीरियत का प्यार देखो आपका मन खुशियोंसे भर जायेगा बाकी कोई दर नहीं है कोई नफरत नहीं है और कोई दहशत नहीं है अमनसे आओ और अमनमे रहकर बहोत ज्यादा खुशिया लेकर जाओ.

धन्यवाद्

Categories: None

Post a Comment

Already a member? Sign In

2 Comments

Reply prasad Chikshe
06:34 AM on October 14, 2009
Nice...great attempt
Reply kowsar
03:50 AM on October 24, 2009
[prasad Chikshe]
thanks!...

Welcome

Recent Photos

   

Upcoming Events

Friday, Dec 25 at 3:00 pm
Friday, Jan 1, All day